• ईसा में विश्वास रखते हुए उनके वचन का पालन करने
    वालों का समूह है पवित्र कलीसिया। सब लोगों को ईश्वरीय
    जीवन में भागीदार बनाने के लिए ईसा कलीसिया में जीवित है
    और कलीसिया में सक्रिय है। पवित्र कलीसिया की तुलना मानव के शरीर और उसके अंगों
    से कर सकते हैं। संत पौलुस कहते हैंः ‘‘आप मसीह का शरीर
    हैं और आपमें से प्रत्येक उसका एक अंग है’’ (कुरिन्थि  12ः27) । 
     
    शरीर के अंग सिर से जुड़े रह कर तरह तरह का कर्तव्य निभाते
    हैं। प्रत्येक अंग अपना धर्म भली भाँति निभाते हुए शरीर
    की प्रगति के लिए काम करता है। सिर के आदेश के अनुसार ही एक अंग
    अपना काम निभाता है। शरीर के अंग विभिन्न धर्म निभाते
    हुए शरीर के सुचारु संचालन और प्रगति के कारण बनते हैं। ईसा अपने रहस्यात्मक शरीर, कलीसिया, का सिर है। 

    ‘‘मनुष्य का शरीर एक है, यद्यपि उसके बहुत से अंग होते हैं
    और सभी अंग, अनेक होते हुए भी, एक ही शरीर बन जाते हैं’’ (कुरिन्थि 12ः12)
     
     
    शरीर के अंगों जैसे हैं मसीह के शरीर, कलीसिया, के
    सदस्य। जैसे शरीर में आँख, कान, हाथ, पैर और अन्य अंगों
    के धर्म भिन्न भिन्न होते हैं, वैसे ही कलीसिया के
    ‘‘मनुष्य का शरीर एक है, यद्यपि उसके बहुत से अंग होते हैं
    और सभी अंग, अनेक होते हुए भी, एक ही शरीर बन जाते
    हैं’’ ।
     
    सदस्यों के दायित्व भी भिन्न्ा भिन्न्ा हैं। प्रत्येक का
    धर्म तब अर्थपूर्ण होता है जब वह सिर से, यानी मसीह से, जुड़ा
    रहता है और अन्य सदस्यों से मिल जुलकर काम करता है। इस प्रकार
    कलीसिया रूपी शरीर बढ़ता है।
    ईसा से जुड़े रह कर अपना धर्म निभाने और भाइयों
    के साथ एकता में बढ़ने के लिए हमें ईश्वरीय जीवन ज़रूरी है।
    यह ईश्वरीय जीवन हमें प्रदान करने के लिए ईसा ने कलीसिया में
    संस्कारों की स्थापना की।
    संस्कारों द्वारा ईसा अपना ईश्वरीय जीवन हमें प्रदान करते

    हम गायें

    गायें हम सब प्रभुवर का
    पावन नाम के कीर्तनगान।
    सीमातीत जो प्रभुवर का
    गायें सादर महिमागान।।
     

     

    हम प्रार्थना करें

     
    हे प्रभु ईसा मसीह, आपने ईश्वरीय जीवन देे कर हमें
    ईश्वर के पुत्र और कलीसिया के सदस्य बनाए। हमें ऐसी सद्बुद्धि
     
     

    हम ईश वचन पढ़ें

     
    1 कुरिन्थि. 12ः12-27
     
     

    याद करें

     
    ‘‘आप मसीह का शरीर हंै और आप में से
    प्रत्येक उसका एक अंग है’’ (1 कुरिन्थि 12ः27)।
     
     

    हम करें

     
    आँख कलीसिया का सिर
    कान देखतीह ै
    होंठ ईश्वरीय जीवन
    मसीह बात करता है
    संस्कार सुनता है
     
     

    मेरा निर्णय

     
    धर्मशिक्षा कक्षाओं में
    मैं लगातार भाग लूँगा/गी
     

     

    हम नाचें और गायें

     
    जैसे सिर से अंग सब मिलते
    वैसे येसु से हम सब मिलते
    हाथ,पाव, नयन, कान
    अपना धर्म पूरा करते
    कलीसिया में हम सब अपना
    शक्ति अपनी येसु देता
    पावन सात संस्कारों में
    ईश्वरी जीवन हमको मिलता
    अच्छे सच्चे फल लाने में।।