पाठ 2
ईसा कलीसिया द्वारा जीवन देता है
-
ईसा में विश्वास रखते हुए उनके वचन का पालन करनेवालों का समूह है पवित्र कलीसिया। सब लोगों को ईश्वरीयजीवन में भागीदार बनाने के लिए ईसा कलीसिया में जीवित हैऔर कलीसिया में सक्रिय है। पवित्र कलीसिया की तुलना मानव के शरीर और उसके अंगोंसे कर सकते हैं। संत पौलुस कहते हैंः ‘‘आप मसीह का शरीरहैं और आपमें से प्रत्येक उसका एक अंग है’’ (कुरिन्थि 12ः27) ।शरीर के अंग सिर से जुड़े रह कर तरह तरह का कर्तव्य निभातेहैं। प्रत्येक अंग अपना धर्म भली भाँति निभाते हुए शरीरकी प्रगति के लिए काम करता है। सिर के आदेश के अनुसार ही एक अंगअपना काम निभाता है। शरीर के अंग विभिन्न धर्म निभातेहुए शरीर के सुचारु संचालन और प्रगति के कारण बनते हैं। ईसा अपने रहस्यात्मक शरीर, कलीसिया, का सिर है।‘‘मनुष्य का शरीर एक है, यद्यपि उसके बहुत से अंग होते हैंऔर सभी अंग, अनेक होते हुए भी, एक ही शरीर बन जाते हैं’’ (कुरिन्थि 12ः12)शरीर के अंगों जैसे हैं मसीह के शरीर, कलीसिया, केसदस्य। जैसे शरीर में आँख, कान, हाथ, पैर और अन्य अंगोंके धर्म भिन्न भिन्न होते हैं, वैसे ही कलीसिया के‘‘मनुष्य का शरीर एक है, यद्यपि उसके बहुत से अंग होते हैंऔर सभी अंग, अनेक होते हुए भी, एक ही शरीर बन जातेहैं’’ ।सदस्यों के दायित्व भी भिन्न्ा भिन्न्ा हैं। प्रत्येक काधर्म तब अर्थपूर्ण होता है जब वह सिर से, यानी मसीह से, जुड़ारहता है और अन्य सदस्यों से मिल जुलकर काम करता है। इस प्रकारकलीसिया रूपी शरीर बढ़ता है।ईसा से जुड़े रह कर अपना धर्म निभाने और भाइयोंके साथ एकता में बढ़ने के लिए हमें ईश्वरीय जीवन ज़रूरी है।यह ईश्वरीय जीवन हमें प्रदान करने के लिए ईसा ने कलीसिया मेंसंस्कारों की स्थापना की।संस्कारों द्वारा ईसा अपना ईश्वरीय जीवन हमें प्रदान करते
हम गायें
गायें हम सब प्रभुवर कापावन नाम के कीर्तनगान।सीमातीत जो प्रभुवर कागायें सादर महिमागान।।हम प्रार्थना करें
हे प्रभु ईसा मसीह, आपने ईश्वरीय जीवन देे कर हमेंईश्वर के पुत्र और कलीसिया के सदस्य बनाए। हमें ऐसी सद्बुद्धिहम ईश वचन पढ़ें
1 कुरिन्थि. 12ः12-27याद करें
‘‘आप मसीह का शरीर हंै और आप में सेप्रत्येक उसका एक अंग है’’ (1 कुरिन्थि 12ः27)।हम करें
आँख कलीसिया का सिरकान देखतीह ैहोंठ ईश्वरीय जीवनमसीह बात करता हैसंस्कार सुनता है