पाठ 4
ज्ञानस्नान: ईसा में जन्म
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निकोदेमुस नामक यहूदी नेता एक बार ईसा के पास आया।ईसा द्वारा किये हुए चमत्कारों के लिए निकोदेमुस ने उनकी प्रशंसा की। बातचीत के दौरान ईसा उससे बोलेः ‘‘मैं आपसे यह कहता हूँ - जब तक कोई दुबारा जन्म न ले, तब तक वह स्वर्ग का राज्य नहीं देख सकता (योहन 3ः3)।
आदि माता-पिता के पाप के कारण हम सब पापावस्था में जन्म
लेते हैं। इस पाप का प्रभाव हमें अच्छाई से दूर करता है; बुराई करने के लिए उकसाता है। इस पापावस्था का ेमूल पाप कहलाता है। ज्ञानस्नान एक ऐसा संस्कार है जो हमें इस मूल पाप की अवस्था से ईश-पुत्र के स्थान की ओर ले जाता है।ज्ञानस्नान द्वारा हम जल और पवित्र आत्मा से दुबारा जन्मलेते हैं। इसके द्वारा हम मूल पाप से और यदि कर्म पाप है तोउससे भी मुक्त होकर पवित्र किए जाते हैं। यही संस्कार हमेंईश्वरीय जीवन में सहभागी और स्वर्गराज्य के अधिकारी बनाताहै।हम ज्ञानस्नान द्वारा पाप से मोचित होते और ईसा में3मूल पाप से और यदि कर्म पाप है तो उससे भी मुक्त कर हमेंईश्वर की संतान, कलीसिया के सदस्य और स्वर्गराज्य के हकदारज्ञानस्नान संस्कार कीविधियाँ गिरजाघर के प्रवेश द्वार सेशुरू होती हैं। वहाँ सेपुरोहित: क्या तुम शैतान की गुलामी से मुक्त होना चाहते/चाहती हो ?उत्तर: जी हाँ, मैं चाहता/चाहती हूँ।पुरोहित: पाप और पाप-मार्ग को तुमत्यागते/त्यागती हो?इसके बाद पुरोहित प्रवेशार्थी का विलेपन करता है; फिर उसकोकलीसिया में स्वीकार करने के प्रतीक के रूप में गिरजाघर मेंप्रवेश कराता है।ज्ञानस्नान स्वीकार करने वाले बच्चे के प्रति उसके धर्ममाता-पिता प्रतिज्ञा करते और धर्मसार बोलते हैं। अगर वयस्कज्ञानस्नान स्वीकार करते हैं तो वे ही प्रतिज्ञा करते और धर्मसारबोलते हंै।ज्ञानस्नान के फल
पाप मुक्तिईश्वरीय जीवनईश्वर की संतान बननाकलीसिया की सदस्यतास्वर्ग के हकदार बननाहम गायें
ज्ञानस्नान के पानी सेदे बना निर्मल हम सब को।नित्य मनोहर ईश्वर नाममहिमा पूरित, सुशोभित हो।।हम प्रार्थना करें
हे ईश्वर, आपने हमें जल और आत्मा से मसीह केशरीर के अंग बनने का अनुग्रह दिया है। ऐसी आशिष दीजिए कि हममें जो ईश्वरीय जीवन है उसे नष्ट किए बिना हम जियें।हम ईश वचन पढ़ें
(योहन 3ः1-8)याद करें
‘‘मैं तुमसे यह कहता हूँ -जब तक कोई जल और पवित्र आत्मा से जन्म न ले,तब तक वह ईश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता’’(योहन 3ः5)।मेरा निर्णय
धर्मसार कण्ठस्थ करूँगा/गीधर्मसार
एक ही सर्वशक्तिमान पिता ईश्वर में हम विश्वास करतेहैं। वह दृश्य और अदृश्य सृष्टि का कर्ता है। एक हीप्रभु ईसा मसीह में हम विश्वास करते हैं। वह ईश्वरका एकलौता पुत्र और सारी सृष्टि का पहलौठा है। वहसभी युगों के पहले पिता से उत्पन्न हुआ है, बनायाहुआ नहीं। वह सच्चे ईश्वर से उत्पन्न सच्चा ईश्वरऔर पिता के साथ एक तत्व है। उसी के द्वारा सारा विश्व रचागया है और सब कुछ बनाया गया है। वह हम मनुष्योंके लिये और हमारी मुक्ति के लिये स्वर्ग से उतरा,पवित्रात्मा के द्वारा शरीर धारण कर मनुष्य बन गया औरकुँवारी मरियम के गर्भ में आकर जन्म लिया। उसनेपोंतुस पिलातुस के समय दुःख भोगा और वह सलीब परचढ़ाया गया, मर गया और दफनाया गया, धर्म ग्रंथ केअनुसार तीसरे दिन जी उठा और स्वर्ग गया और पिता केदाहिने विराजमान है। वह मृतकों और जीवितों कान्याय करने के लिए आएगा। एक ही पवित्रात्मा में हम विश्वासहम करें
जानकारी प्राप्त कर लिखो।1. ज्ञानस्नान में मेरा नाम :2. मेरे धर्म-पिता और धर्म-माता के नाम :3. ज्ञानस्नान की तिथि :4. जिस गिरजाघर में मेराज्ञानस्नान हुआ उसका नाम :5. जिस पुरोहित ने मुझे ज्ञानस्नान दिया, उनका नाम :हम नाचें और गायें
ज्ञानस्नान के पावन क्षण मेंईश्वर संतान बन जाते हम।सब पापों से मोचित होकरनित पावन बन जाते हैं हम।।पावन आत्मा में बल देताईश्वरी जीवन हमको देता।बनाता संतान कलीसिया कीहम सब को प्रभु येसु मसीहा।।विश्वास का दान प्रभुवर देताहममें ईश्वरी प्रेम बरसाता।दिल को मुद्रांकित कर देताज्ञानस्नान के फल प्रभु देता।।व्यतीत करना जीवन भलाईस्वर्गीय धाम में आ जाने में।वरदानों को हमको दे दियास्वर्ग पिता परमेश्वर ने हमें।।