• निकोदेमुस नामक यहूदी नेता एक बार ईसा के पास आया।ईसा द्वारा किये हुए चमत्कारों के लिए निकोदेमुस ने उनकी प्रशंसा की। बातचीत के दौरान ईसा उससे बोलेः ‘‘मैं आपसे यह कहता हूँ - जब तक कोई दुबारा जन्म न ले, तब तक वह स्वर्ग का राज्य नहीं देख सकता (योहन 3ः3)।

    आदि माता-पिता के पाप के कारण हम सब पापावस्था में जन्म

    लेते हैं। इस पाप का प्रभाव हमें अच्छाई से दूर करता है; बुराई करने के लिए उकसाता है। इस पापावस्था का ेमूल पाप कहलाता है। ज्ञानस्नान एक ऐसा संस्कार है जो हमें इस मूल पाप की अवस्था से ईश-पुत्र के स्थान की ओर ले जाता है। 
     

    ज्ञानस्नान द्वारा हम जल और पवित्र आत्मा से दुबारा जन्म
    लेते हैं। इसके द्वारा हम मूल पाप से और यदि कर्म पाप है तो
    उससे भी मुक्त होकर पवित्र किए जाते हैं। यही संस्कार हमें
    ईश्वरीय जीवन में सहभागी और स्वर्गराज्य के अधिकारी बनाता
    है।
    हम ज्ञानस्नान द्वारा पाप से मोचित होते और ईसा में3
     
    मूल पाप से और यदि कर्म पाप है तो उससे भी मुक्त कर हमें
    ईश्वर की संतान, कलीसिया के सदस्य और स्वर्गराज्य के हकदार
     
    ज्ञानस्नान संस्कार की
    विधियाँ गिरजाघर के प्रवेश द्वार से
    शुरू होती हैं। वहाँ से

    पुरोहित: क्या तुम शैतान की गुलामी से मुक्त होना चाहते/चाहती हो ?
    उत्तर: जी हाँ, मैं चाहता/चाहती हूँ।
    पुरोहित: पाप और पाप-मार्ग को तुम
    त्यागते/त्यागती हो?
     
    इसके बाद पुरोहित प्रवेशार्थी का विलेपन करता है; फिर उसको
    कलीसिया में स्वीकार करने के प्रतीक के रूप में गिरजाघर में
    प्रवेश कराता है।
     
    ज्ञानस्नान स्वीकार करने वाले बच्चे के प्रति उसके धर्म
    माता-पिता प्रतिज्ञा करते और धर्मसार बोलते हैं। अगर वयस्क
    ज्ञानस्नान स्वीकार करते हैं तो वे ही प्रतिज्ञा करते और धर्मसार
    बोलते हंै।

    ईसा ने आÛ्रह किया कि ज्ञानस्नान }ारा ई‘वरीय जीवन में
    सहभाÛी होकर सभी लोÛ ई‘वर की संतान बनें। उन्होंने
    अपने ि‘ा‘‘यों से कहा : ‘‘ इसलि, तुम लोÛ जा कर सब रा‘‘ट्रों को
    ि‘ा‘‘य बनाओ और उन्हें पिता, पु= और पवि= आत्मा के नाम पर बपतिस्मा दो’’ (मत्ती 28ः19)। 
     
    ज्ञानस्नान Û्रह.ा करने से हमें ई‘वरीय जीवन और ई‘वर
     

     

    ज्ञानस्नान के फल

     
    पाप मुक्ति
    ईश्वरीय जीवन
    ईश्वर की संतान बनना
    कलीसिया की सदस्यता
    स्वर्ग के हकदार बनना

     

    हम गायें

     
    ज्ञानस्नान के पानी से
    दे बना निर्मल हम सब को।
    नित्य मनोहर ईश्वर नाम
    महिमा पूरित, सुशोभित हो।।
     

    हम प्रार्थना करें

     
    हे ईश्वर, आपने हमें जल और आत्मा से मसीह के
    शरीर के अंग बनने का अनुग्रह दिया है। ऐसी आशिष दीजिए कि हम
    में जो ईश्वरीय जीवन है उसे नष्ट किए बिना हम जियें।

     

    हम ईश वचन पढ़ें

    (योहन 3ः1-8)
     

    याद करें

     
    ‘‘मैं तुमसे यह कहता हूँ -
    जब तक कोई जल और पवित्र आत्मा से जन्म न ले,
    तब तक वह ईश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता’’
    (योहन 3ः5)।

     

    मेरा निर्णय

     
    धर्मसार कण्ठस्थ करूँगा/गी

     धर्मसार

     
    एक ही सर्वशक्तिमान पिता ईश्वर में हम विश्वास करते
    हैं। वह दृश्य और अदृश्य सृष्टि का कर्ता है। एक ही
    प्रभु ईसा मसीह में हम विश्वास करते हैं। वह ईश्वर
    का एकलौता पुत्र और सारी सृष्टि का पहलौठा है। वह
    सभी युगों के पहले पिता से उत्पन्न हुआ है, बनाया
    हुआ नहीं। वह सच्चे ईश्वर से उत्पन्न सच्चा ईश्वर
    और पिता के साथ एक तत्व है। उसी के द्वारा सारा विश्व रचा
    गया है और सब कुछ बनाया गया है। वह हम मनुष्यों
    के लिये और हमारी मुक्ति के लिये स्वर्ग से उतरा,
    पवित्रात्मा के द्वारा शरीर धारण कर मनुष्य बन गया और
    कुँवारी मरियम के गर्भ में आकर जन्म लिया। उसने
    पोंतुस पिलातुस के समय दुःख भोगा और वह सलीब पर
    चढ़ाया गया, मर गया और दफनाया गया, धर्म ग्रंथ के
    अनुसार तीसरे दिन जी उठा और स्वर्ग गया और पिता के
    दाहिने विराजमान है। वह मृतकों और जीवितों का
    न्याय करने के लिए आएगा। एक ही पवित्रात्मा में हम विश्वास

     

    हम करें

     
    जानकारी प्राप्त कर लिखो।
    1. ज्ञानस्नान में मेरा नाम :
    2. मेरे धर्म-पिता और धर्म-माता के नाम :
    3. ज्ञानस्नान की तिथि :
    4. जिस गिरजाघर में मेरा
    ज्ञानस्नान हुआ उसका नाम :
    5. जिस पुरोहित ने मुझे ज्ञानस्नान दिया, उनका नाम :

     

    हम नाचें और गायें

     
    ज्ञानस्नान के पावन क्षण में
    ईश्वर संतान बन जाते हम।
    सब पापों से मोचित होकर
    नित पावन बन जाते हैं हम।।
    पावन आत्मा में बल देता
    ईश्वरी जीवन हमको देता।
    बनाता संतान कलीसिया की
    हम सब को प्रभु येसु मसीहा।।
    विश्वास का दान प्रभुवर देता
    हममें ईश्वरी प्रेम बरसाता।
    दिल को मुद्रांकित कर देता
    ज्ञानस्नान के फल प्रभु देता।।
    व्यतीत करना जीवन भलाई
    स्वर्गीय धाम में आ जाने में।
    वरदानों को हमको दे दिया
    स्वर्ग पिता परमेश्वर ने हमें।।