• ईसा के स्वर्गारोहण के बाद शिष्य गण घर के भीतर द्वार
    बन्द करके प्रार्थना में लीन होकर बैठे थे। ईसा की
    माता मरियम भी उनके साथ थी। शिष्यों को यह भय था कि
    यहूदी लोग उन्हें भी बन्दी बनाकर मार डालेंगे।पेंतेकोस्त के दिन जब वे
    प्रार्थना कर रहे थे तब पवित्रात्मा उन पर उतर आया। अग्नि की जीभ के रूप में आकर पवित्रात्मा
    प्रत्येक के ऊपर ठहर गया। पवित्रात्मा से परिपूरित हो जाने से
    शिष्यों को एक नया उत्साह और नई शक्ति मिली। पेत्रुस, जिसने
    तीन बार ईसा को जानने से इन्कार किया था, लोगों से ईसा
    के बारे में बोलने लगा। उनका प्रवचन सुनकर उसी दिन करीब
    तीन हज़ार लोगों ने ईसा में विश्वास किया।
     
    दूसरे शिष्यों ने पवित्रात्मा की शक्ति से दुनिया के
    विभिन्न भागों में जाकर ईसा के बारे में घोषणा
    की। पवित्रात्मा के अभिषेक से प्राप्त शक्ति और उत्साह से वे
    ईसा के प्रति शहीद होने तक समर्थ बन गए।

    आदिम कलीसिया के सात उपयाजकों में से एक, स्तेफ़नुस,
    को पत्थरों से मार डालने केलिए लोग दौड़ आये। फिर
    भी पवित्र आत्मा की शक्ति से वे निर्भीक रहे। इतना ही नहीं,
    उसी पवित्र आत्मा की शक्ति से स्तेफ़नुस ने उन लोगों केलिए
    प्रार्थना की तथा उनके अपराध क्षमा कर दिये।स्तेफ़नुस कलीसिया का प्रथम शहीद है।
     
    अपनी मृत्यु के पहले ही ईसा मसीह ने शिष्यों को पवित्र
    आत्मा प्रदान करने का वचन दिया थाः‘‘परन्तु वह सहायक, वह
    पवित्रात्मा, जिसे पिता मेरे नाम पर भेजेगा, तुम्हें सब कुछ समझा
    देगा। मैंने तुम्हें जो कुछ बताया, वह उसका स्मरण दिलायेगा’’(योहन 14ः26) जिन लोगों ने ज्ञानस्नान
    ग्रहण किया था उनके ऊपर जब शिष्यों ने हाथ रखकर
    प्रार्थना की तब उन्हें भी पवित्रात्मा की शक्ति मिली।

    जब प्रेरितों ने जो येरुस्लोम में रहते  थे ,यह सुना की समारियों ने ईरवर का वचन स्वीकार कर लिया ,तो उन्होंने पेत्रुस और  योहन को उनके पास भेजा | वे दोनों वहाँ गये और उन्होंने सामरियों कोलिए यह प्रार्थना की की उनहें पवित्रात्मा प्राप्त हो | पेत्रुस और उनहें पवित्रात्मा प्राप्त हो गया (प्रेरित 8 :14 -17 )|

    एफेसुस में संत पौलुस की मुलाकात कुछ शिष्यों से हुई | उनहें पवित्रात्मा नहीं प्राप्त हुआ था | उनहें सिर्फ योहन बपतिस्ता का ज्ञानसनान ही मिली था | उन्होंने ईसा के नाम पर ज्ञानसनान ही मिला था |उन्होंने ईसा के नाम पर ज्ञानसनान ग्रहण किया और जब संत पौलुस ने उनके उन पर हाथ रखा ,तब पवित्रात्मा उन पर उतरा (प्रेरित 19 :2 -6 )|

    हमें पवित्रात्मा की विशेष शकित और अनुग्रह तिलभिषेक संस्कार द्वारा मिलता है | सुसमाचार का प्रचार करने तथा नबियों की तरह साहस के साथ प्रभु ईसा मसीह के साक्षी बनने के लिए यही संस्कार हमें देता है |